माननीय अध्यक्ष महोदय का संदेश......

हिंदुओं के सभी त्यौहार धर्म से जुडे़ हैं । ऐसा ही एक त्यौहार मकर संक्रांति भी है । मकर संक्रांति पर्व सूर्यदेव से जुड़ा हुआ है । इस दिन भगवान सूर्य उत्तरायण होते हैं और इसी के साथ हिंदुओं में सभी शुभकर्मों की शुरुआत होती है । धार्मिक मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन देवलोक में दिन का आरंभ होता है] इसलिए इसको देवायन भी कहा जाता है । इस दिन देवलोक के दरवाजे खुल जाते हैं । मकर संक्रांति का त्यौहार देश के विभिन्न भागों में भिन्न-भिन्न नामों से मनाया जाता है, कहीं खिचड़ी, कहीं पोंगल, कहीं संक्रांति और कहीं उत्तरायणी आदि ।
उत्तरायण सूर्य का महत्व प्राचीन काल से है और यदि हम महाभारत के काल में जायं तो देखते हैं कि इच्छामृत्यु के वरदान के बावजूद पितामह भीष्म तब तक बाणों की कष्टदायी शय्या पर लेटे रहे जब तक भगवान सूर्य उत्तरायण नहीं हुए । उन्होंने अपने प्राण सूर्यदेव के उत्तरायण होने के बाद ही त्यागे ।
मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर मैं अपनी तथा बिहार विधान सभा की ओर से उत्तरायण सूर्य को नमन करते हुए बिहार सहित संपूर्ण देशवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देता हूं ।


Shri Vijay Kumar Sinha,
Hon'ble Speaker, Bihar Vidhan Sabha

दिनांक 12.01.2021

स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर मैं आज उन्हें सादर नमन करता हूँ। स्वामी विवेकानंद का व्यक्तित्व जितना ही पारदर्शी रहा है उतना ही विराट रहा है । उनके व्यक्तित्व के बारे में कुछ लिखना सूरज को दीपक दिखाने के समान है लेकिन उनकी जयंती के शुभ अवसर पर मेरे मन की श्रद्धा दो-चार पंक्तियाँ लिखने के लिये मुझे विवश कर रही है।
कितना अच्छा और सार्थक नाम दिया नरेंद्र को गुरुदेव रामकृष्ण परमहंस ने । उन्हें नर के इंद्र अर्थात राजा से सीधे विवेक के आनंद में डूबे रहने का आशीर्वाद दिया क्योंकि गुरुदेव जानते थे इंद्र या राजा के पद में मद है जबकि विवेक यानी ज्ञान का पद परम पद है । इसी परम पद को स्वामी विवेकानंद ने न सिर्फ प्राप्त किया बल्कि पूरी दुनिया को अपने जीवन काल तक उस ज्ञान का दान अनवरत रूप से करते रहे ।
सनातन धर्म के लोच को स्वामीजी ने अपने आचरण में अपनाया । यही कारण है कि शिकागो की धर्मसभा में विश्वबंधुत्व का संदेश देते हुए उन्होंने उस सभा को मेरे अमेरिकी भाई-बहनो कहकर संबोधित किया। विश्वबंधुत्व की यह अद्भुत अवधारणा सनातन धर्म में है ।
स्वामीजी ने सनातन धर्म की इस विशेषता को आत्मसात किया कि यह किसी पर थोपा नहीं जाता बल्कि इसकी मूल अवधारणा है अपने आपको जानो ।
स्वामीजी का जीवनकाल मात्र 39 वर्ष का रहा लेकिन उन्होंने इसी अल्पावधि में ऐसा काम किया जो सौ वर्ष जीने वाले भी लोग नहीं कर पाते हैं । उन्होंने समाज को यह दिखाया कि महत्व आयु नहीं रखती बल्कि व्यक्ति के द्वारा किये गये काम महत्व रखते हैं ।
स्वामी विवेकानंद की विशेषताओं में एक यह भी रही कि उनमें नकारात्मकता बिल्कुल नहीं रही । वे सदैव सकारात्मक सोचते रहे और अपनी सोच को आम जन तक पहुँचाने के लिए उन्होंने परिव्राजक के रूप में भारत सहित पूरी दुनिया में भ्रमण किया । सनातन धर्म की आध्यात्मिक शक्ति से दुनिया को परिचित कराने के लिये ही वे संन्यासी होकर भ्रमण करते रहे । स्वामीजी का नियंत्रण अपनी हर साँस पर था तभी उन्होंने अपनी मृत्यु को स्वयं अंगीकार किया और ध्यानावस्था में ही उन्होंने महासमाधि ली । यह भारत की विशेषता है कि जहाँ बड़े-बड़े राजा-महाराजाओं को लोग झुठला देते हैं वहाँ एक संन्यासी को आज भी अपने मन में बसाये हुये हैं । यही स्वामीजी के प्रति देश की सच्ची श्रद्धा है ।
स्वामीजी ने 19वीं शताब्दी में 21वीं शताब्दी के भविष्य की जो भविष्यवाणी की थी अब वह सफलीभूत हो रही है ।
स्वामीजी के सम्मान में 12 जनवरी को युवा दिवस मनाया जाता है । युवा दो अक्षरों से बना है - यु और वा । हम दोनों को देखें तो यु से युग और वा से वाहक बनता है । युवा ही युग के वाहक हैं और 21वीं सदी की नींव, रीढ़ और मस्तिष्क हैं । युवा अपने कौशल और हुनर से आगे बढ़ेगा । यही युवा आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करेगा और भारत विश्वगुरु बनेगा ।
स्वामी विवेकानंद हम लोगों के आदर्श हैं, मार्गदर्शक हैं और सदैव हमारे प्रेरणास्रोत बने रहेंगे । उनकी जयंती के अवसर पर मैं अपनी तथा बिहार विधान सभा की ओर से सादर नमन करते हुए उनके प्रति विनम्र श्रद्धा व्यक्त करता हूँ ।

दिनांक 01.01.2021

नव वर्ष 2021 का आगमन हो चुका है । हर नया वर्ष एक नयी आशा-विश्वास लिये आता है कि हमारे जीवन में कुछ सकारात्मक होगा और यही भाव हमें नये वर्ष का स्वागत करने के लिये प्रोत्साहित करता है । बीता वर्ष 2020 पूरे विश्व के लिये एक संकट लेकर आया और लगा कि मानवजाति का ही नाश हो जायेगा परंतु मानव संघर्षशील है । मानव जीवन एक धारा है जो हजारों लाखों वर्षों से निरंतर चली आ रही है । इसी संघर्ष की क्षमता के आधार पर चिकित्सा विज्ञानियों ने इस संकट से निपटने के लिये कमर कसी और वे कोरोना की वैक्सीन बनाकर उसका परीक्षण कर रहे हैं । मैं इस नव वर्ष पर माननीय प्रधानमंत्रीजी द्वारा कोविड-19 से निपटने के सटीक समय और रणनीति के लिये उनके प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि यदि माननीय प्रधानमंत्रीजी तथा माननीय मुख्यमंत्रीजी ने आवश्यक तैयारियों के लिये सम्पूर्ण लाॅक डाउन न किया होता तो आज बिहार सहित भारतवर्ष में शायद ही कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमण से बच पाता । मैं न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के चिकित्सा विज्ञानियों को इस नव वर्ष के अवसर पर विशेष रूप से धन्यवाद देना चाहता हूं कि मानव जीवन के संरक्षण के लिये जिस उत्साह और तत्परता से उन्होंने काम किया वह मानव जाति पर उपकार है । मैं राज्य एवं देश के सभी कोरोना योद्धाओं को भी धन्यवाद देता हूं तथा उनके समर्पण को नमन करता हूं । मैं बिहार विधान सभा की तरफ से बिहार सहित पूरे देश की जनता को नव वर्ष 2021 की शुभकामनाएं देता हूं ।